निकलो तुम आज फिर
रात को निखरने दो
देखकर आयना कभी
चाँद को भी सवरने दो
रात को निखरने दो
देखकर आयना कभी
चाँद को भी सवरने दो
उतार दो ये बिंदी
वहाँ तारों को जड़ना है
खुली रखना जुल्फें
अभी बादलों को उड़ना है
वहाँ तारों को जड़ना है
खुली रखना जुल्फें
अभी बादलों को उड़ना है
उठाकर पलकों को
समन्दर को जलने दो
देखकर आयना कभी
चाँद को भी सवरने दो
समन्दर को जलने दो
देखकर आयना कभी
चाँद को भी सवरने दो
गुमसुम ये जहान
तेरी आवाज़ को बेक़रार है
लबों की हलचल का
कलियों को इंतजार है
तेरी आवाज़ को बेक़रार है
लबों की हलचल का
कलियों को इंतजार है
तुम से चुराकर अदाएं
फूलों को भी तो खिलने दो
देखकर आयना कभी
चाँद को भी सवरने दो
फूलों को भी तो खिलने दो
देखकर आयना कभी
चाँद को भी सवरने दो
चल थोडा लहराकर
आवारा सड़कों को संभलना है
लट हटा गालों से
जुगनुओं को पिघलना है
आवारा सड़कों को संभलना है
लट हटा गालों से
जुगनुओं को पिघलना है
बाहों से आवाज़ देकर
आज आसमाँ को भी गिरने दो
देखकर आयना कभी
चाँद को भी सवरने दो
आज आसमाँ को भी गिरने दो
देखकर आयना कभी
चाँद को भी सवरने दो
निकलो तुम आज फिर
रात को निखरने दो
देखकर आयना कभी
चाँद को भी सवरने दो
रात को निखरने दो
देखकर आयना कभी
चाँद को भी सवरने दो
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