वो बूढ़ा पके हुए बालों से,
मेरे बाबूजी की तस्वीर बना रहा था
मेरे बाबूजी की तस्वीर बना रहा था
वो अधेड़ उम्र की औरत,
जैसे मेरी माँ का नक़ाब पहने थी
जैसे मेरी माँ का नक़ाब पहने थी
वो लड़का जिसने किसी लड़के के सर छाता खोला,
बिलकुल मेरे भाई सा लगता था
बिलकुल मेरे भाई सा लगता था
शायद मैं रिश्तों के करीब आया हूँ,
या शायद दूर जाता देख,
या शायद दूर जाता देख,
रिश्तों ने आवाज़ दी होगी...