अरसों बाद फिर वही बात हुई
कल शब आयने से मुलाकात हुई
कल शब आयने से मुलाकात हुई
कैसे आँखों में बिता था बचपन
चिलमिलाती धुप, चाँदनी रात हुई
चिलमिलाती धुप, चाँदनी रात हुई
बहाने पैरों को थिरकने के
कभी बर्थ डे, कभी बारात हुई
कभी बर्थ डे, कभी बारात हुई
हर बात पे बस मुस्कुराना था
फिर चाहे जो भी बात हुई
फिर चाहे जो भी बात हुई
अनबन हुई दोस्तों से कभी
तो करवटों में सारी रात हुई
तो करवटों में सारी रात हुई
मासूम ख्वाहिशें भीगती
की जब भी कभी बरसात हुई
की जब भी कभी बरसात हुई
ज़िन्दगी ज़िंदा नन्ही हथेली के साथ हुई
छूटकर जाने वो किसके हाथ हुई
छूटकर जाने वो किसके हाथ हुई
अरसों बाद आयने से मुलाकात हुई
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