Thursday, 5 May 2011

दिन बदल गया -


पैड-पौधे, हरी खिलखिलाती पत्तियां
फूलों की रंगत, रंगीन तितलियाँ
पत्तियों से सरकती ओस की बूँदें
गीली मिट्टी से उठती सोंधी सोंधी खुशबू
हवा की सरसराहट और चिड़ियों की किलकारियां
रंगों को निखारती सूरज की नर्म किरने

दिन जागा ही था
की मोटरों के होर्न और धुंए में
सब धुन्दला हुआ

No comments:

Post a Comment